विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस
- दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है.
- इस वर्ष विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस की थीम" सहायक प्रौद्योगिकी, सक्रिय भागीदारी" हे
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अप्रैल 2007 को ऑटिज्म जागरूकता दिवस की घोषणा की थी
- इस दिवस पर ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों और बड़ों के जीवन में सुधार के लिए कदम उठाने के साथ ही उन्हें सार्थक जीवन बिताने में सहायता दी जाती है.
- भारत के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार प्रति 110 में से एक बच्चा ऑटिज्म से ग्रस्त होता है हर 70 बालकों में से एक बालक इस बीमारी से प्रभावित होता है.
- इस बीमारी की चपेट में आने की बालिकाओं के मुकाबले बालकों कीज्यादा संभावना होती है
- इस विकार को पहचानने का कोई निश्चित तरीका नहीं है लेकिन शीघ्र निदान किए जाने की स्थिति में थोड़ा बहुत सुधार लाया जा सकता है.
- यह बीमारी दुनिया भर में पाई जाती है इसका असर बच्चे, परिवारों, समुदाय और समाज पर पड़ता है.
ऑटिज्म क्या है?
- ऑटिज्म /स्वलीनता मानसिक रोग या मस्तिष्क के विकास के दौरान होने वाला एक गंभीर विकार है. नीले रंग को ऑटिज्म का प्रतीक माना गया है.
- इस विकार के लक्षण जन्म या बाल्यावस्था में ही नजर आने लगते हैं. यह विकार व्यक्ति की सामाजिक कुशलता और संप्रेषण क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालता है .जीवन पर्यंत बना रहने वाला विकार है.
- इस विकार से पीड़ित बच्चों का विकास अन्य बच्चों सेअलग होता है.
- इससे प्रभावित व्यक्ति, सीमित और दोहराव युक्त व्यवहार करता है, जैसे एक ही काम को बार बार करना.
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस: ऑटिज्म क्या है?
Reviewed by Anukul Gyan
on
April 02, 2019
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